PM Vishwakarma Training Center List : ट्रेनिंग लिस्ट जारी पीएम विश्वकर्मा योजना 2025, जाने क्या पूरी अपडेट

PM Vishwakarma Training Center List : प्रधानमंत्री विश्वकर्म योजना 2025 ट्रेनिंग सेंटर के लिस्ट के बारे में जानकारी चाहते हो, तो इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ो, जहां पर इसे संबंधित सभी प्रकार की जानकारी को लेकर बताया गया है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना भारत सरकार की एक अनूठी पहल है, जो देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सशक्त बनाने और उनके कौशल को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य रखती है। इस योजना के अंतर्गत, कारीगरों को मुफ्त में कौशल प्रशिक्षण, आर्थिक सहयोग और उन्नत उपकरण प्रदान किए जाते हैं, ताकि वे अपनी कला को और भी निखार सकें।
PM Vishwakarma Yojana का मुख्य आकर्षण है, कारीगरों को उनके हुनर को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षित करना। इसके लिए देशभर में आधुनिक सुविधाओं से लैस कई ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं।
PM Vishwakarma Training Center List Highlights
योजना का नाम | प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) |
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शुरुआत की तारीख | 17 सितंबर 2023 |
लक्ष्य | पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक और तकनीकी सहायता प्रदान करना |
लाभार्थी | 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगर और शिल्पकार |
प्रमुख लाभ | मुफ्त प्रशिक्षण, ₹500 प्रतिदिन भत्ता, ₹15,000 टूलकिट सहायता, सस्ता ऋण |
प्रशिक्षण अवधि | 5 से 7 दिन (व्यवसाय के अनुसार) |
ऋण सुविधा | पहली किश्त: ₹1 लाख, दूसरी किश्त: ₹2 लाख, ब्याज दर: 5% |
पात्रता आयु | 18 से 50 वर्ष |
आधिकारिक वेबसाइट | www.pmvishwakarma.gov.in |
आवेदन प्रक्रिया | ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, दस्तावेज अपलोड, सत्यापन, प्रशिक्षण केंद्र आवंटन |
डिजिटल प्रोत्साहन | प्रति डिजिटल लेन-देन ₹1 का प्रोत्साहन |
1. प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य:
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों, शिल्पकारों, दस्तकारों और छोटे उद्योगों में काम करने वाले लोगों को अपने कौशल को बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करना है। इस योजना के माध्यम से, सरकार इन वर्गों को प्रमाणित प्रशिक्षण प्रदान करती है, जिससे वे अपने कौशल को आधुनिक तकनीकी और नवीनतम बाजार की मांग के अनुसार सुधार सकें। इसके अलावा, यह योजना कारीगरों को बेहतर उपकरण, आधुनिक प्रौद्योगिकी, और बाजार से जुड़ी जानकारी प्रदान करती है, जिससे उनके उत्पादन और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होता है।
2. प्रशिक्षण केंद्रों का महत्व:
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत, विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण केंद्रों का गठन किया गया है। ये केंद्र न केवल कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, बल्कि वे उन्हें नए तकनीकी पहलुओं से भी परिचित कराते हैं, जिससे वे अपने काम में अधिक दक्षता और गुणवत्ता ला सकें।

3. प्रशिक्षण केंद्रों की सूची:
भारत सरकार ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए हैं। ये केंद्र पारंपरिक कारीगरी से लेकर नवीनतम निर्माण तकनीकों तक विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। यहाँ हम कुछ प्रमुख क्षेत्रों और केंद्रों का विवरण देंगे:
1. हस्तशिल्प और कारीगरी (Handicrafts and Artisans):
भारत में विभिन्न राज्यों में पारंपरिक हस्तशिल्प और कारीगरी के प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर प्रशिक्षित कारीगरों को अपने पारंपरिक शिल्प को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ने का अवसर मिलता है।
- राजस्थान: यहाँ पर मिट्टी के बर्तन, लकड़ी की नक्काशी, और अन्य हस्तशिल्प के लिए प्रशिक्षण केंद्र हैं।
- उत्तर प्रदेश: यहाँ पर ताम्र शिल्प, जरी और चूड़ी बनाने के प्रशिक्षण केंद्र हैं।
- कर्नाटका: कर्नाटका में बांस के उत्पाद और कांसे की कारीगरी के प्रशिक्षण केंद्र हैं।
2. निर्माण और निर्माण उपकरण (Construction and Tools):
निर्माण क्षेत्र में कार्य करने वाले कारीगरों को नवीनतम उपकरण और निर्माण विधियों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है।
- महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में सिविल निर्माण और पेंटिंग के लिए कई केंद्र हैं।
- तेलंगाना: यहाँ पर निर्माण उपकरण के प्रयोग, प्लंबिंग, और इलेक्ट्रिकल कार्यों के लिए केंद्र स्थापित किए गए हैं।
- दिल्ली: यहाँ पर निर्माण कार्यों में दक्षता बढ़ाने के लिए केंद्र हैं, जो विभिन्न निर्माण विधियों और तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
3. कृषि और कृषि उत्पाद (Agriculture and Agri-products):
कृषि क्षेत्र में कार्य करने वाले कारीगरों और शिल्पकारों को कृषि उत्पादों की नई तकनीकों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है।
- पंजाब: कृषि उत्पादों को सुधारने के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र हैं।
- बिहार: कृषि उपकरणों के निर्माण और मरम्मत के लिए केंद्र स्थापित किए गए हैं।
4. वस्त्र निर्माण और सिलाई (Textile and Sewing):
भारत में विभिन्न स्थानों पर वस्त्र निर्माण और सिलाई के प्रशिक्षण केंद्र हैं।
- गुजरात: यहाँ पर पारंपरिक कढ़ाई, बुनाई और सिलाई के लिए केंद्र हैं।
- उत्तराखंड: यहां पर पर्वतीय क्षेत्र के कारीगरों को सिलाई और वस्त्र निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाता है।
5. सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology):
सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रशिक्षण केंद्र, कारीगरों और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीकी से परिचित कराते हैं।
- बेंगलुरु: यहाँ पर डिजिटल उपकरणों और सेवाओं से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है।
4. प्रशिक्षण प्रक्रिया और लाभ:
प्रशिक्षण प्रक्रिया में विभिन्न चरण होते हैं, जिसमें चयन प्रक्रिया, प्रशिक्षण अवधि और प्रमाणपत्र वितरण शामिल है। इस योजना का प्रमुख लाभ यह है कि कारीगरों को न केवल पारंपरिक तकनीकों पर प्रशिक्षण मिलता है, बल्कि उन्हें नवीनतम उद्योग मानकों के बारे में भी बताया जाता है। इस योजना के लाभों में प्रमुख हैं:
- उन्नत कौशल: कारीगरों को उनके क्षेत्र में उन्नत कौशल प्राप्त होता है।
- स्वतंत्र रोजगार के अवसर: प्रशिक्षित कारीगर अपने कौशल के माध्यम से स्वतंत्र रूप से रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।
- आर्थिक समृद्धि: प्रशिक्षण के बाद, कारीगर अधिक दक्षता के साथ काम करते हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है।
- स्थिरता: प्रशिक्षित कारीगर विभिन्न क्षेत्रों में स्थिर रोजगार पा सकते हैं।
5. प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का भविष्य:
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का भविष्य काफी उज्जवल दिखाई दे रहा है। यह योजना भारतीय कारीगरों और शिल्पकारों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता प्रदान करेगी। इसके माध्यम से, देश में पारंपरिक शिल्प और कारीगरी को नई दिशा मिलेगी, जिससे इन क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
इसके अतिरिक्त, यह योजना भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को साकार करने में भी सहायक होगी। यदि कारीगरों को अपने कौशल में और सुधार करने का अवसर मिलता है, तो यह न केवल उनकी व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाएगा, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा।